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सफ़र का कोई किनारा

wordsofaditya Poetry · melancholic

सफ़र का कोई किनारा

सफ़र का कोई किनारा कभी नहीं मिलता,
हर क़दम पे नया इशारा कभी नहीं मिलता।

Aditya Sharma 1 / 4
wordsofaditya Poetry · melancholic

राहों में बिखरी हैं यादों की परछाइयाँ,
मगर सच का उजियारा कभी नहीं मिलता।

हर मंज़िल पे ठहरकर सोचा मैंने यह,
कि मंज़िल से सहारा कभी नहीं मिलता।

Aditya Sharma 2 / 4
wordsofaditya Poetry · melancholic

आँखों में देखे मंज़र सिमट गए दिल में,
पर दिल से गुज़रा नज़ारा कभी नहीं मिलता।

जाने कितनी मौतें रोज़ जी लेता हूँ,
मगर जीने का सहारा कभी नहीं मिलता।

Aditya Sharma 3 / 4
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थकान से टूटी रूह संभल जाती है,
मौत का कोई किनारा कभी नहीं मिलता।

आदित्य लिखता है तन्हाई की सच्चाई,
क्योंकि रूह का इशारा कभी नहीं मिलता।

Aditya Sharma 4 / 4