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ये मेरी दौड़ है

wordsofaditya Poetry · reflective

ये मेरी दौड़ है

आजकल हर रोज़ सोने से पहले,
सुबह उठकर,
मैं अपने आप से सिर्फ़ एक सवाल पूछता हूँ,

क्या ये मेरी दौड़ है?

मैं हर रोज़ किसी चीज़ के पीछे दौड़ने का सोचता हूँ,
लेकिन पूरा दिन बैठा रहता हूँ।

मेरी सोच का दायरा सीमित नहीं है,
वह एक समुंदर है जिसका कोई किनारा नहीं है।

Aditya Sharma 1 / 2
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ऐसा लगता है, हर रोज़ ठंडी कढ़ी उबालकर बासी चावलों के साथ खा रहा हूँ,
और पेट नहीं भर रहा है।

शायद यह निरंतर न ख़त्म होने वाली भूख ही मेरी दौड़ है।

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