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यादों का समुंदर

wordsofaditya Poetry · reflective

यादों का समुंदर

अक्सर मेरी यादों के समुंदर में एक मछली आ जाती है।
वह अपने साथ अपना दीवान लाती है।
उस दीवान पर कभी मैं स्वयं सोता हूँ, कभी वह सोती है।

Aditya Sharma 1 / 7
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शिकायत सिर्फ़ एक ही होती है,
कभी मैं जागता हूँ, कभी वह जागती है।

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जब मैं सोता हूँ तो मेरे सपने में आता है
कि मेरी यादों का समुंदर अनेक मछलियों से घिरा हुआ है।
लेकिन एक मछली मुझसे यह शिकायत करती है,
कि मैं अब वह शख़्स न रहा, जो पहले था।

Aditya Sharma 3 / 7
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मेरे भीतर पहले एक खुला आसमान था,
जो था आज़ाद… आज़ाद किससे?
आज़ाद मैं बेड़ियों से था,
समाज की, ख़ुद की।

Aditya Sharma 4 / 7
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मेरे अंदर एक आस थी,
जो कभी नासाज़ नहीं थी।
इतने में मेरा सपना टूट गया,
आँख जब खुली मेरी,

Aditya Sharma 5 / 7
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तो मुझे मेरी यादों के समुंदर में भी
एक खुला आसमान दिखा,
एक ढलती शाम दिखी,
एक नया सवेरा दिखा,

Aditya Sharma 6 / 7
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और एक नया शख़्स दिखा।

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