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माँ की रोटी

wordsofaditya Poetry · joyful

माँ की रोटी

माँ जब रोटी बनाती है,
तो उसमें थोड़ी सी जल जाती है।

वह उसे मुझे नहीं देती,
वह ख़ुद खाती है।

मैंने एक बार पूछा,
"माँ, तुम जली हुई रोटी क्यों खाती हो?"

उसने कहा,
"अरे, मुझे अच्छी लगती है।"

Aditya Sharma 1 / 2
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मैं उस दिन से
जानता हूँ,
कि माँ का प्यार
झूठ नहीं बोलता,
वह सिर्फ़ जली हुई रोटी खाता है।

Aditya Sharma 2 / 2