तुम से पहले मैं
romantic
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तुम से पहले मैं
तुम्हारे आने से पहले
मैं एक अधूरी ग़ज़ल था,
मतला था, पर मक़्ता नहीं।
तुम्हारे जाने के बाद
मैं फिर वही हो गया,
लेकिन अब मतला भी याद नहीं।
यादें एक अजीब चीज़ हैं, यार।
वह आती हैं बिन बुलाए,
जाती हैं बिन बताए।
और मैं हर शाम बैठकर
उस खिड़की को देखता हूँ
जिसकी दिशा में तुम गई थीं।
खिड़की अब भी वहीं है।
दिशा भी वही है।
पर तुम,
तुम किसी और ग़ज़ल का हिस्सा बन गई हो।
और मैं अभी भी
अपना मक़्ता ढूँढ रहा हूँ।