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तुम से पहले मैं

wordsofaditya Poetry · romantic

तुम से पहले मैं

तुम्हारे आने से पहले
मैं एक अधूरी ग़ज़ल था,
मतला था, पर मक़्ता नहीं।

तुम्हारे जाने के बाद
मैं फिर वही हो गया,
लेकिन अब मतला भी याद नहीं।

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यादें एक अजीब चीज़ हैं, यार।
वह आती हैं बिन बुलाए,
जाती हैं बिन बताए।

और मैं हर शाम बैठकर
उस खिड़की को देखता हूँ
जिसकी दिशा में तुम गई थीं।

Aditya Sharma 2 / 3
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खिड़की अब भी वहीं है।
दिशा भी वही है।
पर तुम,
तुम किसी और ग़ज़ल का हिस्सा बन गई हो।

और मैं अभी भी
अपना मक़्ता ढूँढ रहा हूँ।

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